अनुच्छेद 83 – संसद‌ के सदनों का अवधि

अनुच्छेद 83 भारतीय संसद के दोनों सदनों – राज्यसभा (उच्च सदन) और लोकसभा (निम्न सदन) के कार्यकाल और उनके सदस्यों की सेवा अवधि से संबंधित है। यह भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली के संचालन में एक महत्वपूर्ण प्रावधान है।

TD Desk

अनुच्छेद 83 (Article 83 in Hindi) – संसद‌ के सदनों का अवधि

(1) राज्य सभा का विघटन नहीं होगा, किन्तु उसके सदस्यों में से यथासंभव निकटतम एक-तिहाई सदस्य, संसद‌ द्वारा विधि द्वारा इस निमित्त किए गए उपबंधों के अनुसार, प्रत्येक द्वितीय वर्ष की समाप्ति पर यथाशक्य शीघ्र निवृत्त हो जाएँगे।

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(2) लोकसभा, यदि पहले ही विघटित नहीं कर दी जाती है तो, अपने प्रथम अधिवेशन के लिए नियत तारीख से 1[पाँच वर्ष] तक बनी रहेगी, इससे अधिक नहीं और [पाँच वर्ष] की उक्त अवधि की समाप्ति का परिणाम लोकसभा का विघटन होगा;

परन्तु उक्त अवधि को, जब आपात की उद्‌घोषणा प्रवर्तन में है तब, संसद‌ विधि द्वारा, ऐसी अवधि के लिए बढ़ा सकेगी, जो एक बार में एक वर्ष से अधिक नहीं होगी और उद्‌घोषणा के प्रवर्तन में न रह जाने के पश्चात्‌ उसका विस्तार किसी भी दशा में छह मास की अवधि से अधिक नहीं होगा।

व्याख्या

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अनुच्छेद 83 भारतीय संसद के दोनों सदनों – राज्यसभा (उच्च सदन) और लोकसभा (निम्न सदन) के कार्यकाल और उनके सदस्यों की सेवा अवधि से संबंधित है। यह भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली के संचालन में एक महत्वपूर्ण प्रावधान है।

अनुच्छेद 83 के अनुसार राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल:

  • छह वर्षों का कार्यकाल: राज्यसभा के प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल छह वर्षों का होता है।
  • आंशिक सेवानिवृत्ति: राज्यसभा कभी भी पूरी तरह से भंग नहीं होती है। प्रत्येक दो वर्षों में, राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। सेवानिवृत्त सदस्य पुनः चुनाव लड़ने के लिए पात्र होते हैं।
  • स्थायी सदन: राज्यसभा को स्थायी सदन कहा जाता है क्योंकि यह कभी भी भंग नहीं होती। यह प्रक्रिया भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली में निरंतरता बनाए रखने के लिए बनाई गई है।

लोकसभा के कार्यकाल:

  • पाँच वर्षों का सामान्य कार्यकाल: लोकसभा का सामान्य कार्यकाल पाँच वर्षों का होता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद, लोकसभा भंग हो जाती है।
  • भंग करने का प्रावधान: राष्ट्रपति, मंत्रिपरिषद की सलाह पर लोकसभा को उसके पाँच साल की अवधि समाप्त होने से पहले भी भंग कर सकता है। यह प्रावधान किसी असाधारण स्थिति में लोकसभा के पुनर्गठन की अनुमति देता है।
  • राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान कार्यकाल का विस्तार: राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में, लोकसभा के कार्यकाल को एक बार में एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। आपातकाल समाप्त होने के बाद, लोकसभा का कार्यकाल अधिकतम छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है।

प्रमुख अंतर:

विशेषताराज्यसभालोकसभा
कार्यकाल6 वर्ष5 वर्ष
भंग होने की स्थितिकभी भी पूरी तरह भंग नहीं होतीसामान्यतः 5 वर्ष बाद भंग होती है
सेवानिवृत्ति का प्रावधानहर 2 वर्षों में 1/3 सदस्य सेवानिवृत्तपूरी लोकसभा भंग होती है
पुनर्निर्वाचनसदस्य फिर से चुनाव लड़ सकते हैंसदस्य फिर से चुनाव लड़ सकते हैं

अनुच्छेद 83 भारतीय संसद के दोनों सदनों की संरचना और कार्यकाल को परिभाषित करता है। राज्यसभा की स्थायित्व और लोकसभा की समयबद्धता भारतीय लोकतंत्र में संतुलन और निरंतरता बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। यह प्रावधान संसद के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने और जनता के प्रतिनिधित्व को प्रभावी बनाने में मदद करता है।

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Source : – भारत का संविधान

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